
बाड़मेर, राजस्थान: देश के तेल और गैस क्षेत्र में स्वच्छ ऊर्जा की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए केयर्न ऑयल एंड गैस ने बाड़मेर स्थित अपने ऑयल फील्ड में हरित ऊर्जा का उपयोग शुरू कर दिया है। 1 अप्रैल 2026 से लागू इस पहल के तहत कंपनी अब अपने कुल बिजली उपयोग का लगभग 20% हिस्सा सौर और पवन ऊर्जा जैसे नवीकरणीय स्रोतों से प्राप्त करेगी, जिससे पर्यावरण संरक्षण और ऊर्जा दक्षता को बढ़ावा मिलेगा।
Key Highlights (मुख्य बिंदु)
- 25 मेगावॉट रिन्यूएबल हाइब्रिड पावर प्रोजेक्ट शुरू
- 20% बिजली अब सौर और पवन ऊर्जा से मिलेगी
- हर साल 115 किलोटन CO₂ उत्सर्जन में कमी
- 153 मिलियन यूनिट ग्रीन एनर्जी का उत्पादन
- ऊर्जा लागत और कार्बन फुटप्रिंट दोनों में कमी
- बाड़मेर बना ग्रीन एनर्जी ट्रांजिशन का केंद्र
परियोजना का पूरा विवरण
केयर्न ऑयल एंड गैस ने इस प्रोजेक्ट के लिए Serentica Renewables के साथ साझेदारी की है। इस समझौते के तहत 25 मेगावॉट (MW) हाइब्रिड रिन्यूएबल ऊर्जा की आपूर्ति सुनिश्चित की गई है। यह ऊर्जा कर्नाटक के गडग स्थित संयंत्र से दी जाएगी, जहां सोलर और विंड एनर्जी का संयोजन अपनाया गया है।
इस प्रोजेक्ट की खास बात यह है कि यह केवल स्वच्छ ऊर्जा प्रदान नहीं करता, बल्कि ऊर्जा की स्थिरता और निरंतरता भी सुनिश्चित करता है। इससे ऑयल फील्ड संचालन में किसी भी प्रकार की रुकावट नहीं आएगी।
पर्यावरण पर प्रभाव
कंपनी के अनुसार, इस पहल से हर साल लगभग 115 किलोटन कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂) उत्सर्जन में कमी आएगी। विशेषज्ञों के मुताबिक, यह प्रभाव करीब 57.5 लाख पेड़ लगाने के बराबर है, जो जलवायु परिवर्तन से लड़ने में एक बड़ा योगदान माना जा रहा है।
तकनीकी विशेषताएं और क्षमता
सोलर और विंड के संयोजन से तैयार यह हाइब्रिड प्रोजेक्ट लगभग 70% तक का कैपेसिटी यूटिलाइजेशन फैक्टर (CUF) हासिल करेगा। यह पारंपरिक सोलर या विंड प्रोजेक्ट्स की तुलना में काफी अधिक है, जिससे बिजली उत्पादन अधिक स्थिर और भरोसेमंद रहेगा।
इस परियोजना के तहत हर साल करीब 153 मिलियन यूनिट हरित ऊर्जा का उत्पादन होगा, जिससे पारंपरिक ऊर्जा स्रोतों पर निर्भरता घटेगी और लागत नियंत्रण में भी मदद मिलेगी।
कंपनी की रणनीति और लक्ष्य
यह पहल केयर्न ऑयल एंड गैस की दीर्घकालिक रणनीति का हिस्सा है, जिसके तहत कंपनी अपने कार्बन फुटप्रिंट को कम करते हुए दशक के अंत तक “नेट-जीरो” लक्ष्य हासिल करना चाहती है।
कंपनी का कहना है कि यह साझेदारी उनके ऊर्जा स्रोतों को अधिक टिकाऊ बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है और भविष्य में नवीकरणीय ऊर्जा का उपयोग और बढ़ाया जाएगा।
ऊर्जा संक्रमण में योगदान
यह प्रोजेक्ट भारत के ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) को भी गति देगा। Serentica Renewables की तकनीकी विशेषज्ञता और बड़े पैमाने पर उत्पादन क्षमता इस बदलाव को मजबूती प्रदान करेगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में अन्य तेल और गैस कंपनियां भी इस मॉडल को अपनाएंगी, जिससे पूरे सेक्टर में ग्रीन एनर्जी का दायरा तेजी से बढ़ेगा।
बाड़मेर बना ऊर्जा बदलाव का केंद्र
राजस्थान का बाड़मेर जिला पहले से ही देश के सबसे बड़े ऑनशोर ऑयल प्रोडक्शन हब के रूप में जाना जाता है। अब ग्रीन एनर्जी के उपयोग से यह क्षेत्र ऊर्जा परिवर्तन के मॉडल के रूप में उभर रहा है।
रेगिस्तानी क्षेत्र में सौर और पवन ऊर्जा की अपार संभावनाओं को देखते हुए यह पहल भविष्य में बड़े निवेश और नई परियोजनाओं का रास्ता खोल सकती है।
निष्कर्ष
कुल मिलाकर, बाड़मेर ऑयल फील्ड में हरित ऊर्जा की यह पहल न केवल पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, बल्कि भारत के ऊर्जा क्षेत्र में स्थिरता और नवाचार का नया उदाहरण भी प्रस्तुत करती है। आने वाले समय में यह मॉडल पूरे देश के लिए प्रेरणा बन सकता है।
FAQ
1. बाड़मेर ऑयल फील्ड में कौन सा नया प्रोजेक्ट शुरू हुआ है?
यहां 25 मेगावॉट का रिन्यूएबल हाइब्रिड पावर प्रोजेक्ट शुरू किया गया है।
2. इस प्रोजेक्ट से कितनी बिजली रिन्यूएबल स्रोतों से मिलेगी?
करीब 20% बिजली अब सौर और पवन ऊर्जा से प्राप्त होगी।
3. CO₂ उत्सर्जन में कितनी कमी आएगी?
हर साल लगभग 115 किलोटन CO₂ उत्सर्जन में कमी आएगी।
4. यह प्रोजेक्ट क्यों महत्वपूर्ण है?
यह प्रोजेक्ट पर्यावरण संरक्षण, ऊर्जा स्थिरता और भारत के ग्रीन एनर्जी लक्ष्य को बढ़ावा देता है।